इनवॉइस और रसीद में क्या फ़र्क है?
इनवॉइस भुगतान माँगता है, रसीद भुगतान की पुष्टि करती है। जानें कब कौन-सा दस्तावेज़ दें, उनमें क्या होता है और अक्सर दोनों की ज़रूरत क्यों पड़ती है।
कई लोग "इनवॉइस" और "रसीद" को एक ही समझते हैं, पर ऐसा नहीं है। इनवॉइस भुगतान की माँग है, जबकि रसीद इस बात का सबूत है कि भुगतान हो गया। ज़्यादातर व्यवसायों को एक ही बिक्री के दो अलग चरणों में दोनों की ज़रूरत होती है।
संक्षिप्त जवाब
| इनवॉइस | रसीद | |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ग्राहक से भुगतान माँगना | भुगतान मिलने की पुष्टि |
| कब | डिलीवरी के बाद, भुगतान से पहले | भुगतान के बाद |
| क्या दिखाता है | बकाया राशि, देय तिथि, बैंक विवरण | प्राप्त राशि, तारीख़, भुगतान का तरीका |
| आम शब्द | "बकाया राशि" | "भुगतान प्राप्त" |
इनवॉइस कब भेजें?
जब आपने सामान दे दिया हो या काम पूरा कर दिया हो और ग्राहक बाद में भुगतान करेगा, तब इनवॉइस भेजें। यह राशि, समय-सीमा और भुगतान का तरीका तय करता है। बिज़नेस ग्राहकों के लिए यही वह दस्तावेज़ है जिससे उनका अकाउंटेंट ख़र्च दर्ज करता है और GST इनपुट टैक्स क्रेडिट लेता है।
रसीद कब दें?
पैसा मिलते ही रसीद दें, ख़ासकर नकद भुगतान पर। रसीद दोनों पक्षों की रक्षा करती है: ग्राहक भुगतान साबित कर सकता है और आप अपने खाते में भुगतान का मिलान कर सकते हैं।
रसीद में आमतौर पर होता है:
- रसीद नंबर और भुगतान की तारीख़।
- किसने भुगतान किया और किसने पैसा प्राप्त किया।
- भुगतान किस चीज़ का है, अक्सर इनवॉइस नंबर के साथ।
- राशि और भुगतान का तरीका: नकद, कार्ड, UPI या बैंक ट्रांसफ़र।
- "भुगतान प्राप्त" का उल्लेख या मुहर, और नकद भुगतान पर हस्ताक्षर।
क्या दोनों चाहिए?
व्यवसायों के बीच बिक्री में ज़्यादातर हाँ: पहले इनवॉइस, फिर ट्रांसफ़र आने पर रसीद या "Paid" लिखा इनवॉइस। दुकानों में छोटी नकद बिक्री के लिए अक्सर एक रसीद काफ़ी होती है। किराया एक ख़ास मामला है: किरायेदारों को HRA क्लेम के लिए अक्सर हर अवधि की किराया रसीद चाहिए होती है।
एक क्लिक में इनवॉइस से रसीद
भुगतान मिलने की पुष्टि "भुगतान हुआ" चिह्न के साथ करें।
अगर इनवॉइस यहीं बनाया है, तो उसे खोलें और "इसमें बदलें" में "रसीद" चुनें। ग्राहक, आइटम और इनवॉइस नंबर अपने आप आ जाएँगे। शुरुआत से बना रहे हैं तो पढ़ें इनवॉइस कैसे बनाएँ।